🪔 २४ तीर्थंकर (Argh Stand Variants)
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ऋषभदेव (आदिनाथ) – प्रथम तीर्थंकर, जिन्होंने मानवता को कृषि, कला और धर्म का मार्ग दिखाया।
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अजितनाथ – अहिंसा और शांति के प्रतीक, दूसरे तीर्थंकर।
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सम्भवनाथ – करुणा और सेवा भावना से पूजनीय।
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अभिनन्दननाथ – विनम्रता और संतोष का संदेश देने वाले।
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सुमतिनाथ – सादगी और सच्चाई से जीवन जीने की प्रेरणा।
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पद्मप्रभु – जिनकी आभा कमल के समान पवित्र मानी जाती है।
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सुपार्श्वनाथ – रक्षा और धर्म पालन के प्रतीक।
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चन्द्रप्रभु – शीतल और शांत स्वभाव के लिए पूजनीय।
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पुष्पदंत (सुविधिनाथ) – पुण्य और सेवा का उपदेश देने वाले।
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शीतलनाथ – शांति और सहनशीलता के आदर्श।
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श्रेयांसनाथ – त्याग और संयम के लिए प्रसिद्ध।
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वासुपूज्य – करुणा और दान के प्रतीक।
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विमलनाथ – निर्मलता और पवित्रता के आदर्श।
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अनन्तनाथ – ज्ञान और अनन्त सुख के दूत।
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धर्मनाथ – धर्म, सत्य और न्याय के उपदेशक।
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शान्तिनाथ – शांति और तपस्या के लिए पूजनीय।
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कुन्तुनाथ – संतुलन और संयम का संदेश देने वाले।
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अरनाथ – वैराग्य और आत्मसंयम के प्रेरणास्रोत।
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मल्लिनाथ – तपस्या और पवित्रता के प्रतीक।
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मुनिसुव्रत स्वामी – व्रत और संयम के आदर्श।
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नामिनाथ – विनय और धर्मपालन के लिए पूजनीय।
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नेमिनाथ – करुणा और अहिंसा का उपदेश देने वाले।
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पार्श्वनाथ – धर्म और करुणा से मानवता को मार्गदर्शन देने वाले।
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महावीर स्वामी – २४वें तीर्थंकर, जिनसे जैन धर्म का मूल दर्शन अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह है।
✨ अन्य पूजन स्वरूप (Extra Variants)
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समुच्च चौबीसी – सभी २४ तीर्थंकरों का सामूहिक पूजन स्वरूप।
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बाहुबली जी – तपस्या और अहिंसा के महान प्रतीक।
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पंच मेरु – पांच पर्वतों पर आधारित पूजन प्रतीक।
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गंधोदक – जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक से प्राप्त पवित्र जल।
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जीनवाणी माता – जिनवाणी (धर्म उपदेश) का स्वरूप, ज्ञान की देवी।
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पद्मावती माता – धर्म की रक्षा करने वाली यक्षिणी।
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क्षेत्रपाल जी – जिनालय की रक्षा करने वाले देव।
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नन्दीश्वर द्वीप – जिन पूजा का पवित्र द्वीप, शास्त्रों में वर्णित |
